- रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के त्यौहार व संस्कृति की अपनी अलग विशेषता है,जो विश्वस्तर पर ख्याति दिलाते हैं। जहां एक ओर बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा है तो वहीं आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों की अनूठी परंपराएं। छत्तीसगढ़ के हर पर्व व त्यौहार मनाने की अपनी-अपनी रीति व परंपराएं लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रदेश में सावन मास की अमावस्या के दिन छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली धूमधाम से मनाया जाता है तो वहीं छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी जहां के निवासी प्रदेश के प्रथम त्यौहार का स्वागत नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही कर लेते हैं। यह अनूठी परंपरा बरसों से चली आ रही है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भखारा क्षेत्र का गांव सेमरा (सी) अपनी अनूठी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। यहां दशहरा को छोड़कर प्रमुख त्यौहार नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं। पीढियों से चली आ रही इस परंपरा को सेमरा (सी) के निवासी धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। गांव के देवता सिरदार देव की बात का मान रखने इस गांव की अनोखी परंपरा लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है, जिसे नजदीक से देखने प्रदेश के अन्य जिलों से भी लोग पहुंचते हैं।
सेमरा (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि, हरेली का पर्व खेती-किसानी से जुड़ा है। यह छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार होने के साथ ही किसानों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आता है। सेमरा (सी) में हरेली का त्यौहार 16 जुलाई को परंपरा के अनुसार ही मना लिया गया था तो पूरे छत्तीसगढ़ में 23 जुलाई को यह त्यौहार मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को गांव के सभी किसान भाइयों ने ग्राम देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की। ग्राम देवता का आशीर्वाद लेकर खेती-किसानी में उपयोगी नांगर, हल, फावड़ा आदि सामानों की पूजा की। चीला का भोग लगाया गया। बैलों की पूजा हुई। इस तरह से किसान परिवार ने यह पर्व धूमधाम से मनाया।
गांव के पूर्व सरपंच घनश्याम देवांगन ने बताया कि अलसुबह से ही किसान ग्राम देवता के मंदिर में पूजा-अर्चना किए। उन्होंने नांगर, बैल, हल व अन्य उपकरणों की पूजा की। बच्चों ने गेड़ी बनाकर दौड़ लगायी, नृत्य किया। किसानों ने विधिवत धान बियासी की शुरूआत की।
ज्ञात हो कि, इस त्यौहार का किसानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के प्रमुख व प्रथम त्यौहार `हरेली` बारिश और खेती-किसानी के मौसम में सावन माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह अपने नाम के अनुरूप हमारे जीवन में `हरियाली` का संदेश लेकर आता है।
रायपुर, (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के त्यौहार व संस्कृति की अपनी अलग विशेषता है,जो विश्वस्तर पर ख्याति दिलाते हैं। जहां एक ओर बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा है तो वहीं आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों की अनूठी परंपराएं। छत्तीसगढ़ के हर पर्व व त्यौहार मनाने की अपनी-अपनी रीति व परंपराएं लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रदेश में सावन मास की अमावस्या के दिन छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली धूमधाम से मनाया जाता है तो वहीं छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी जहां के निवासी प्रदेश के प्रथम त्यौहार का स्वागत नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही कर लेते हैं। यह अनूठी परंपरा बरसों से चली आ रही है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भखारा क्षेत्र का गांव सेमरा (सी) अपनी अनूठी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। यहां दशहरा को छोड़कर प्रमुख त्यौहार नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं। पीढियों से चली आ रही इस परंपरा को सेमरा (सी) के निवासी धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। गांव के देवता सिरदार देव की बात का मान रखने इस गांव की अनोखी परंपरा लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है, जिसे नजदीक से देखने प्रदेश के अन्य जिलों से भी लोग पहुंचते हैं।
सेमरा (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि, हरेली का पर्व खेती-किसानी से जुड़ा है। यह छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार होने के साथ ही किसानों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आता है। सेमरा (सी) में हरेली का त्यौहार 16 जुलाई को परंपरा के अनुसार ही मना लिया गया था तो पूरे छत्तीसगढ़ में 23 जुलाई को यह त्यौहार मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को गांव के सभी किसान भाइयों ने ग्राम देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की। ग्राम देवता का आशीर्वाद लेकर खेती-किसानी में उपयोगी नांगर, हल, फावड़ा आदि सामानों की पूजा की। चीला का भोग लगाया गया। बैलों की पूजा हुई। इस तरह से किसान परिवार ने यह पर्व धूमधाम से मनाया।
गांव के पूर्व सरपंच घनश्याम देवांगन ने बताया कि अलसुबह से ही किसान ग्राम देवता के मंदिर में पूजा-अर्चना किए। उन्होंने नांगर, बैल, हल व अन्य उपकरणों की पूजा की। बच्चों ने गेड़ी बनाकर दौड़ लगायी, नृत्य किया। किसानों ने विधिवत धान बियासी की शुरूआत की।
ज्ञात हो कि, इस त्यौहार का किसानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के प्रमुख व प्रथम त्यौहार `हरेली` बारिश और खेती-किसानी के मौसम में सावन माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह अपने नाम के अनुरूप हमारे जीवन में `हरियाली` का संदेश लेकर आता है।















