रायपुर | 12 मार्च 2017 00 बुजुर्गों के जमाने से चली आ रही है परंपरा
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। पूरा भारत देश जहां 12 व 13 मार्च को होली के रंग में सराबोर होगा वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम सेमरा (सी) में 5 व 6 मार्च को होली खेल ली गई। पौने दो सौ की आबादी वाले सेमरा गांव के ग्रामीण सैकड़ों वर्षों से इस अनोखी परंपरा को निभा रहे हैं। ग्राम देवता का मान रखने के लिए इस गांव के निवासी होली का त्यौहार तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लेते हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण-
ग्राम सेमरी (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि इस वर्ष 5 मार्च को रात्रि होलिका दहन किया गया। 6 मार्च को परंपरा अनुसार होली खेली गई। रात्रि को ग्राम देवता के मंदिर में परंपरा अनुसार पूजा के बाद होलिका दहन किया गया। दूसरे दिन यानी 6 मार्च को सुबह पुन: ग्राम देवता की विधि विधान के साथ पूजा के बाद रंग-गुलाल खेला गया। गांव की फाग मंडली ने नंगाड़ों की धुन में फाग गायन किया। फाग गीतों के स्वर फूटते ही गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग डंडा नृत्य पर जमकर झूमे। इसी तरह इस गांव में दीपावली, पोला और हरेली के पर्व को भी यहां तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिया जाता है।
परंपरा की शुरूआत से अंजान ग्रामवासी-
अब तक किसी ने भी अपने पूर्वजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा से मुंह नहीं मोड़ा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस पंरपरा की शुरुआत कब हुई, इससे ग्रामीण अनजान हैं। यहां ग्राम देवता सिरदार देव के स्वप्न को साकार करने प्रतिवर्ष त्यौहार एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं।
कौन थे सिरदार देव-
सैकड़ों वर्ष पूर्व इस गांव की भूमि में एक बुजुर्ग आकर निवास किए। उनका नाम सिरदार था। उनकी चमत्कारिक शक्तियों एवं बातों से गांव के लोगों की परेशानियां दूर होने लगीं। लोगों में उनके प्रति आस्था व श्रद्धा का विश्वास उमडऩे लगा। समय गुरजने के बाद सिरदार देव के मंदिर की स्थापना की गई। मान्यता है कि किसी किसान को स्वप्न देकर सिरदार देव ने कहा था कि प्रतिवर्ष दीपावली, होली, हरेली व पोला ये चार त्यौहार हिंदी पंचाग में तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मनाए जाएं, ताकि इस गांव में उनका मान बना रहे। तब से ये चार त्यौहार प्रतिवर्ष ग्रामदेव के कथनानुसार मनाते आ रहे हैं।
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। पूरा भारत देश जहां 12 व 13 मार्च को होली के रंग में सराबोर होगा वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम सेमरा (सी) में 5 व 6 मार्च को होली खेल ली गई। पौने दो सौ की आबादी वाले सेमरा गांव के ग्रामीण सैकड़ों वर्षों से इस अनोखी परंपरा को निभा रहे हैं। ग्राम देवता का मान रखने के लिए इस गांव के निवासी होली का त्यौहार तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लेते हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण-
ग्राम सेमरी (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि इस वर्ष 5 मार्च को रात्रि होलिका दहन किया गया। 6 मार्च को परंपरा अनुसार होली खेली गई। रात्रि को ग्राम देवता के मंदिर में परंपरा अनुसार पूजा के बाद होलिका दहन किया गया। दूसरे दिन यानी 6 मार्च को सुबह पुन: ग्राम देवता की विधि विधान के साथ पूजा के बाद रंग-गुलाल खेला गया। गांव की फाग मंडली ने नंगाड़ों की धुन में फाग गायन किया। फाग गीतों के स्वर फूटते ही गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग डंडा नृत्य पर जमकर झूमे। इसी तरह इस गांव में दीपावली, पोला और हरेली के पर्व को भी यहां तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिया जाता है।
परंपरा की शुरूआत से अंजान ग्रामवासी-
अब तक किसी ने भी अपने पूर्वजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा से मुंह नहीं मोड़ा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस पंरपरा की शुरुआत कब हुई, इससे ग्रामीण अनजान हैं। यहां ग्राम देवता सिरदार देव के स्वप्न को साकार करने प्रतिवर्ष त्यौहार एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं।
कौन थे सिरदार देव-
सैकड़ों वर्ष पूर्व इस गांव की भूमि में एक बुजुर्ग आकर निवास किए। उनका नाम सिरदार था। उनकी चमत्कारिक शक्तियों एवं बातों से गांव के लोगों की परेशानियां दूर होने लगीं। लोगों में उनके प्रति आस्था व श्रद्धा का विश्वास उमडऩे लगा। समय गुरजने के बाद सिरदार देव के मंदिर की स्थापना की गई। मान्यता है कि किसी किसान को स्वप्न देकर सिरदार देव ने कहा था कि प्रतिवर्ष दीपावली, होली, हरेली व पोला ये चार त्यौहार हिंदी पंचाग में तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मनाए जाएं, ताकि इस गांव में उनका मान बना रहे। तब से ये चार त्यौहार प्रतिवर्ष ग्रामदेव के कथनानुसार मनाते आ रहे हैं।


















