Sunday, 30 July 2017

यहां नियत तिथि से सप्ताह भर पूर्व मना लिए प्रथम त्यौहार


- रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। छत्तीसगढ़ के त्यौहार व संस्कृति की अपनी अलग विशेषता है,जो विश्वस्तर पर ख्याति दिलाते हैं। जहां एक ओर बस्तर का विश्व प्रसिद्ध दशहरा है तो वहीं आदिवासी बाहूल्य क्षेत्रों की अनूठी परंपराएं। छत्तीसगढ़ के हर पर्व व त्यौहार मनाने की अपनी-अपनी रीति व परंपराएं लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है। प्रदेश में सावन मास की अमावस्या के दिन छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली धूमधाम से मनाया जाता है तो वहीं छत्तीसगढ़ का एक गांव ऐसा भी जहां के निवासी प्रदेश के प्रथम त्यौहार का स्वागत नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही कर लेते हैं। यह अनूठी परंपरा बरसों से चली आ रही है।
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के भखारा क्षेत्र का गांव सेमरा (सी) अपनी अनूठी परंपरा के कारण प्रसिद्ध है। यहां दशहरा को छोड़कर प्रमुख त्यौहार नियत तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं। पीढियों से चली आ रही इस परंपरा को सेमरा (सी) के निवासी धूमधाम से मनाते आ रहे हैं। गांव के देवता सिरदार देव की बात का मान रखने इस गांव की अनोखी परंपरा लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करती है, जिसे नजदीक से देखने प्रदेश के अन्य जिलों से भी लोग पहुंचते हैं।
सेमरा (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि, हरेली का पर्व खेती-किसानी से जुड़ा है। यह छत्तीसगढ़ का प्रथम त्यौहार होने के साथ ही किसानों के लिए खुशी का पैगाम लेकर आता है। सेमरा (सी) में हरेली का त्यौहार 16 जुलाई को परंपरा के अनुसार ही मना लिया गया था तो पूरे छत्तीसगढ़ में 23 जुलाई को यह त्यौहार मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 16 जुलाई को गांव के सभी किसान भाइयों ने ग्राम देवता की विधिवत पूजा-अर्चना की। ग्राम देवता का आशीर्वाद लेकर खेती-किसानी में उपयोगी नांगर, हल, फावड़ा आदि सामानों की पूजा की। चीला का भोग लगाया गया। बैलों की पूजा हुई। इस तरह से किसान परिवार ने यह पर्व धूमधाम से मनाया।
गांव के पूर्व सरपंच घनश्याम देवांगन ने बताया कि अलसुबह से ही किसान ग्राम देवता के मंदिर में पूजा-अर्चना किए। उन्होंने नांगर, बैल, हल व अन्य उपकरणों की पूजा की। बच्चों ने गेड़ी बनाकर दौड़ लगायी, नृत्य किया। किसानों ने विधिवत धान बियासी की शुरूआत की।
ज्ञात हो कि, इस त्यौहार का किसानों को बेसब्री से इंतजार रहता है। कृषि प्रधान छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के प्रमुख व प्रथम त्यौहार `हरेली` बारिश और खेती-किसानी के मौसम में सावन माह की अमावस्या के दिन मनाया जाता है। यह अपने नाम के अनुरूप हमारे जीवन में `हरियाली` का संदेश लेकर आता है। 
दिनांक : 2017-07-23 प्रेषित : vns009

Tuesday, 14 March 2017

इस गांव में हफ्ते भर पहले ही लोगों ने मना ली होली

रायपुर | 12 मार्च 2017 00 बुजुर्गों के जमाने से चली आ रही है परंपरा
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। पूरा भारत देश जहां 12 व 13 मार्च को होली के रंग में सराबोर होगा वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के ग्राम सेमरा (सी) में 5 व 6 मार्च को होली खेल ली गई। पौने दो सौ की आबादी वाले सेमरा गांव के ग्रामीण सैकड़ों वर्षों से इस अनोखी परंपरा को निभा रहे हैं। ग्राम देवता का मान रखने के लिए इस गांव के निवासी होली का त्यौहार तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लेते हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण-
ग्राम सेमरी (सी) के सरपंच सुधीर बललाल ने वीएनएस को बताया कि इस वर्ष 5 मार्च को रात्रि होलिका दहन किया गया। 6 मार्च को परंपरा अनुसार होली खेली गई। रात्रि को ग्राम देवता के मंदिर में परंपरा अनुसार पूजा के बाद होलिका दहन किया गया। दूसरे दिन यानी 6 मार्च को सुबह पुन: ग्राम देवता की विधि विधान के साथ पूजा के बाद रंग-गुलाल खेला गया। गांव की फाग मंडली ने नंगाड़ों की धुन में फाग गायन किया। फाग गीतों के स्वर फूटते ही गांव के बच्चे, युवा और बुजुर्ग डंडा नृत्य पर जमकर झूमे। इसी तरह इस गांव में दीपावली, पोला और हरेली के पर्व को भी यहां तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व ही मना लिया जाता है।
परंपरा की शुरूआत से अंजान ग्रामवासी-
अब तक किसी ने भी अपने पूर्वजों के जमाने से चली आ रही इस परंपरा से मुंह नहीं मोड़ा है। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस पंरपरा की शुरुआत कब हुई, इससे ग्रामीण अनजान हैं। यहां ग्राम देवता सिरदार देव के स्वप्न को साकार करने प्रतिवर्ष त्यौहार एक सप्ताह पूर्व ही मना लिये जाते हैं।
कौन थे सिरदार देव-
सैकड़ों वर्ष पूर्व इस गांव की भूमि में एक बुजुर्ग आकर निवास किए। उनका नाम सिरदार था। उनकी चमत्कारिक शक्तियों एवं बातों से गांव के लोगों की परेशानियां दूर होने लगीं। लोगों में उनके प्रति आस्था व श्रद्धा का विश्वास उमडऩे लगा। समय गुरजने के बाद सिरदार देव के मंदिर की स्थापना की गई। मान्यता है कि किसी किसान को स्वप्न देकर सिरदार देव ने कहा था कि प्रतिवर्ष दीपावली, होली, हरेली व पोला ये चार त्यौहार हिंदी पंचाग में तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मनाए जाएं, ताकि इस गांव में उनका मान बना रहे। तब से ये चार त्यौहार प्रतिवर्ष ग्रामदेव के कथनानुसार मनाते आ रहे हैं।

Sunday, 5 March 2017

राजधानी में सुआ नृत्य की आभा बिखेर रही गंडई की मंडली ( विशेष)

रायपुर | 28 अक्टूबर 2016 00 मनुष्य और सुआ समझते हैं एक-दूसरे की बात : कमला
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। चलो मन बंसरी बजावे जिहां मोहना रे...राधा रानी नाचे ठुमा ठुम...रास रचावे जिहां गोकुल गुवाला रे....मिरदंग बाजे धुमा धुम...मोर सुवा ना मिरदंग बाजे धुमा-धुम....तरी हरी नहा ना रे, नाना मोर सुवा ना.....तरी हरी नाना रे नाना...। ये गीत की पंक्तियां कानों में पड़ते ही आंखों के सामने दृश्य उकर जाता है। बांस की बनी टोकरी में मिट्टी का बना सुआ और इर्द-गिर्द महिलाओं या युवतियों का समूह सुआ गीत का गायन कर पारंपरिक नृत्य करते दिखाई देता हैं। कुछ इसी तरह का दृश्य राजधानी के चौक-चौराहों, मोहल्लों व गलियों में इन दिनों दिखाई दे रहा है। पारंपरिक सुआ नृत्य करने इन दिनों छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले की तहसील गंडई से 7 महिलाओं की टोली राजधानी रायपुर पहुंची है। कई वर्षों से ये टोली पूरे 15 दिन रायपुर में ही ठहरकर गली-मोहल्लों में सुआ नृत्य कर चंदा जमा करती है। ग्रुप की मुख्या श्रीमती कमला ने वीएनएस से चर्चा के दौरान सुआ नृत्य की परंपरा की जानकारी दी।
श्रीमकी कमला ने कहा कि कई वर्षों से वे लोग राजधानी आ रहे हैं। यहां 17 दिन रूककर राजधानी की गली-मोहल्लों, संस्थानों में सुआ नृत्य कर चंदा जमा करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष शहर के रामसागरपारा स्थित करोड़ीमल धर्मशाला के पीछे एक परिचित द्वारा ठहरने की व्यवस्था की जाती है। प्रतिवर्ष दशहरा के दो दिन पूर्व गंडई से रायपुर पहुंचते हैं और दीपावली के दिन सुबह सभी अपने गृहग्राम गंडई के लिए रवाना हो जाते हैं। श्रीमती कमला ने बताया कि टोली में श्रीमती सुजाता, श्रीमती निर्मला, श्रीमती विमला,श्रीमती ममता, श्रीमती राखी सहित 1 अन्य साथी श्रीमती शर्मा शामिल है। सभी गंडई के रहवासी हैं।
00 तो इसलिए रखते हैं सुआ
श्रीमती कमला के अनुसार सुआ हरियाली का प्रतीक है। पक्षियों में सुआ ही एक ऐसा है जो मनुष्य द्वारा सिखाई बातों को बोल सकता है। सुआ और मनुष्य का साथ बहुत करीब का है। इसलिए बांस की टोकरी में सुआ रखते हैं। साथ ही एक पौराणिक कथा से भी परिचय कराते हुए श्रीमती कमला ने बताया कि भगवान शंकर और माता पार्वती से भी सुआ का जुड़ाव है। उन्होंने कहा कि एक बार शंकर जब माता पार्वती को कुछ गोपनीय बात बता रहे थे तो सुआ ने पूरी बात सुन ली थी और दोहराने लगा तो भगवान शंकर ने उसका पीछा किया, लेकिन वह पकड़ से दूर था। किसी तरह हाथ में आए सुआ को भगवान शंकर ने पिंजरे में कैद कर लिया ताकि वह भेद नहीं खोल सके। बहरहाल सुआ की करूण पुकार सुनकर भोलेनाथ ने उसे अभयदान दिया। जिसके बाद सुआ ने किसी को भेद नहीं बताया और उनके करीब हो गया। इस कारण सुआ को टोकरी में रखकर सुआ गीत गाया जाता है।
00 तो इस लिए सुआ गीत का गायन
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में दीपावली के दिन गौरी-गौरा के रूप में भगवान शंकर और माता पार्वती का विवाह किया जाता है। जिस तरह विवाह में विवाह के गीत का गायन होता है ठीक उसी तरह छत्तीसगढ़ में गौरी-गौरा के विवाह के पूर्व सुआ गीत का गायन किया जाता है। इस गीत का गायन तथा सुआ नृत्य कर समूह की महिलाएं चंदा जमा करती है और दीपावली के दिन अपने गृहग्राम लौटकर गौरी-गौरा की विवाह धूमधाम से किया जाता है। गृहग्राम में गौरी-गौरा चौरा बना हुआ है जहां सारी परंपरा के अनुसार गाजे-बाजे के साथ गौरी-गौरा का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। कुम्हार के घर से उन्हार(मिट्टी के चौकी पर चढ़ी रंग-बिरंगी पन्नी) लाकर सजाया जाता है। दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा के दिन जंवारा विसर्जन किया जाता है।
00 छत्तीसगढ़ के लोकगीत में विविधता
छत्तीसगढ़ी लोकभाषा में गीतों की परंपरा है। छत्तीसगढ़ के प्रमुख और लोकप्रिय गीत सुआगीत, ददरिया, करमा, डण्डा, फ ाग, चनौनी, बांस गीत, राउत गीत, पंथी गीत आदि का समय-समय पर विशेष अवसर पर गायन किया जाता है। सुआ गीत करुणा का प्रतीक है। इसे विशेषकर गोंड जाति की नारियां दीपावली पर्व पर आंगन के बीच में पिंजरे में बंद हुआ सुआ को प्रतीक बनाकर (मिट्टी का तोता) उसके चारो ओर गोलाकार वृत्त में नृत्य करती है लेकिन अब छत्तीसगढ़ के सभी स्थानों में दशहरा और दीपावली के मध्य सुआ नृत्य की प्रथा विस्तारित हो चुकी है। महिलाओं और युवतियों की टोली सुआ नृत्य करते इन दिनों हर जगह दिखाई देती है।

सेमरा सी में दीपावली रविवार को, महाराष्ट्र की नाचा पार्टी लगाएगी चार चांद (वीएनएस विशेष)

रायपुर | 22 अक्टूबर 2016 00 गोवर्धन पूजा सोमवार को
-रविशंकर शर्मा की विशेष रिपार्ट
रायपुर, (वीएनएस)। दीपो का त्यौहार दीपावली का जहां पूरा भारत बेसब्री से इंतजार कर रहा है वहीं छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में दीपावली का इंतजार लगभग खत्म हो चुका है। धमतरी जिले के ग्राम सेमरा सी में दीपावली 23 अक्टूबर यानी रविवार को मनायी जा रही है तो गोवर्धन पूजा 24 अक्टूबर सोमवार को होगी। छत्तीसगढ़ का यह गांव अपनी अद्भुत परंपरा के लिए जाना जाता है। ग्राम देवता सिरदार देव का मान रखने सेमरावासी दीपावली सहित अन्य तीन प्रमुख त्यौहार एक सप्ताह पहले ही मना लेते हैं। पूरे गांव में दो दिनों का मेला सा रहता है। दूर-दूर से नाते-रिश्तेदार जुटते हैं। इस बार को सेमरा के त्यौहार में महाराष्ट्र की नाचा पार्टी चार चांद लगाने आ रही हैै।
सेमरा सी के ग्राम देवता का मान रखने गांव के लोग होली, हरेली, पोला और दीपावली तय तिथि से एक सप्ताह पूर्व मना लेते हैं। इसके पीछे ग्राम देवता सिरदार देव के सवप्न का मान रखना है। सिरदार देव ने एक किसान को सवप्न देकर ऐसा करने कहा था। सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाने सेमरा सी का 180 घर (1 हजार की अबादी) एकजुट है। जात-पात, ऊंच-नीच को दरकिनार कर सभी गांव में ग्राम देवता के मंदिर के पास एकजुट होकर दिया जलाते हैं। लक्ष्मी पूजा करते हैं, गोवर्धन पूजा करते हैं, फिर अपने-अपने घरों में जाकर पूजन कर पटाखे फोडते है। खुशियां मनाते हैं। इस गांव में बस त्यौहार मनाने की तिथि अलग है बाकी रीत-रिवाज और परंपरा एक सी है। गांव के यादव, राउत अपने-अपने पशुओं की पूजा गोवर्धन पूजा के दिन करते हैं।
ग्राम सेमरा सी के सरंपच सुधीर बल्लाल ने वीएनएस से चर्चा के दौरान बताया कि गांव में कल यानी रविवार को लक्ष्मी पूजा तथा सोमवार को गोवर्धन पूजा का उत्सव होगा। इस त्यौहार को मनाने जहां सेमरा सी का सभी घर शामिल होगा वहीं त्यौहार में शामिल होने बाहर से भी नाते-रिश्तेदार पहुंच चुके है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक घर में 30-40 मेहमान पहुंचे हैं। पूरा गांववासी और मेहमान साथ मिलकर त्यौहार मनाएंगे। श्री बल्लाल ने बताया गांव में साफ-सफाई, रौशनी, पानी आदि की सुविधा (व्यवस्था) की गई है। इस बार मिसकरी महाराष्ट्र तथा पूरे बंजारी महाराष्ट्र की नाचा पार्टी आ रही है, जो लक्ष्मी पूजा तथा गोवर्धन पूजा की रात प्रस्तुती देगी।
00 ग्राम देवता के समीप जलेगा पहला दिया, खुदेगा गोवर्धन
गांव के पूर्व सरपंच घनश्याम देवांगन ने चर्चा के दौरान बताया कि रविवार सुबह 9 बजे गांव वाले गौरा-गौरी के लिए माटी (मिट्टी) लेने जाएंगे। शाम को गाजे-बाजे के साथ ग्राम देवता के समीप उपस्थित होंगे। शाम को सिरदार देव मंदिर परिसर में लक्ष्मी पूजा होगी । दीपक जलाये जायेंगे। फिर सब अपने-अपने घर जाकर पूजा करेंगे। पटाखे फोड़ेंगे तथा खुशियां मनाएंगे। रात्रि को सभी ग्राम देवता के मंदिर के पास जुटेंगे, यहां नाचा का कार्यक्रम होगा।
अगले दिन यानी सोमवार अलसुबह 4 बजे गांववासी सिरदार देव मंदिर परिसर के पास पुन: जुटेेंगे। गौरी-गौरा निकालेंगे। विसर्जन कर गांव के यादव अपने-अपने पशुओं को सौहाई बाधेंगे। शाम को गोवर्धन खोदेंगे। फिर रात्रि नाचा का कार्यक्रम होगा। इस तरह दोनों दिन धूमधाम से दीपावली और गोवर्धन पूजा का त्यौहार मनाया जायेगा।

...तूम जियो हजारों साल ये मेरी आरजू , हैप्पी बर्थ डे टू यू सीएम साहब.. हैप्पी बर्थ डे टू यू

रायपुर | 15 अक्टूबर 2016 रायपुर, (वीएनएस)। बार-बार ये दिन आये.. बार-बार ये दिल गाये.. आप जियो हजारों साल, ये मेरी आरजू.... हैप्पी बर्थ डे टू यू... हैप्पी बर्थ डे टू यू, हैप्पी बर्थ डे टू यू सीएम साहब, हैप्पी बर्थ डे टू यू..... उक्त गीत का गायन शासकीय दृष्टि श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की सुमन तिवारी, वर्षा, सरिता व जागेश्वरी ने छत्तीसगढ़ के मुख्या मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के आगमन के साथ ही किया। इस गीत के साथ ही स्टेडियम में मौजूद सभी ने खड़े होकर सीएम डॉ. सिंह को उनके जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं व बधाईयां दीं। आज सरदार बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम बूढ़ापारा, रायपुर का उन्नतिकरण एवं आधुनिकीकरण लोकार्पण कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने की। ज्ञातव्य हो कि आज प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह का जन्मदिवस है। हाथ में तिरंगा थामे उक्त ग्रुप की व्हील चेयर पर दी गई प्रस्तुति सहित सभी प्रस्तुतियों को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिह ने भी सराहा।
इंडोर स्टेडियम में आज संध्या लोकार्पण समारोह व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के जन्मदिवस पर समाज कल्याण विभाग द्वारा रंगा-रंग प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम में जहां एबिलिटी अनलिमिटेड दिव्यांग ग्रुप के व्हील चेयर नृत्य ने लोगों दिल जीत लिया वहीं शासकीय दृष्टि श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की सुमन तिवारी, वर्षा, सरिता व जागेश्वरी के गीतों ने आज की संध्या में चार चांद लगा दिये।
डॉ. सलाउद्दीन पासा के शिष्यों ने व्हील चेयर पर नृत्य कर आकर्षक प्रस्तुति दीं। पासा ने वीएनएस प्रतिनिधि को चर्चा के दौरान बताया कि उनके शिष्यों ने इंग्लैण्ड के हाउस ऑफ कॉमन में भारतीय संस्कृति की प्रस्तुति व्हील चेयर पर दी साथ ही यूके, मस्कट, मलेशिया सहित अन्य देशों में भी भारत की संस्कृति की प्रस्तुति दे चुके हैं। भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के समक्ष भी प्रस्तुति दे चुके हैं। आज इंडोर स्टेडियम में उनके शिष्यों ने सूफी नृत्य, शास्त्रीय संगीत, भगवत गीता के श्लोकों पर व्हील चेयर नृत्य की प्रस्तुति देकर सबको आश्चर्य चकित कर दिया। सभी इस ग्रुप की प्रस्तुति को एक-टक निहारते रहे। सभी ने सराहा और सम्मान किया। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा विकलांग नहीं, दिव्यांग कहो की अवाज पूरे भारत में बुलंद हो चुकी है। पासा के ये दिव्यांग शिष्यों ने उपस्थित सभी को बता दिया कि दिव्यांग चाहे तो वह सभी कार्य कर सकता है जैसे सामान्य नागरिक करता है। पासा के शिष्यों ने मणिपुर के थामता मार्शल आर्ट की प्रस्तुति व्हील चेयर पर दी। जोश से सराबोर होकर इस आर्ट को तलवारबाजी के द्वारा किया जाता है। तलवार से तलवार टकराते समय निकलती चिंगारियों के इस करतब नृत्य को देखकर सभी अपनी कुर्सी से उठने को मजबूर हो गए। पूरा स्टेडियम ताली की गूंज से गुंजायमान हो गया। पासा के एक शिष्य मनीष ने व्हील चेयर को स्पींग कर दिखाया। ज्ञात हो कि स्पींग से ही इस ग्रुप का नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज हो चुका है। इस ग्रुप में चार दिव्यांग युवक व्हील चेयर पर प्रस्तुति देते हैं। और चार युवतियां भी उनका साथ विभिन्न प्रस्तुतियों में निभाती हैं। ये युवतियां बोल व सुन नहीं सकती। लेकिन धुनों की अवाज मन से सुन ये आकर्षक प्रस्तुति देते हैं।
00 डॉक्टर ने किया सलाम
पासा ने मुख्यमंत्री की चिरायु योजना के चिकित्सा अधिकारी को स्टेज पर बुलाकर व्हील चेयर में बिठाया। और एक करतब करने के लिए प्रेििरत किया। पासा के शिष्य ने व्हील चेयर स्पींग एक हाथ से फिर दोनों हाथों से कर-कर चिकित्सा अधिकारी को दिखाया। साथ ही व्हील चेयर पलटने का स्टंट भी किया। पासा ने चिकित्सा अधिकारी की व्हील चेयर पलट दी। चिकित्सा अधिकारी आखिर उठ नहीं पाये तो मनीष ने उन्हें उठाया। चिकित्सा अधिकारी ने कहा-हम एक चिकित्सक होने के नाते रोजाना दिव्यांगों से रूबरू होते हैं। आज की ये प्रस्तुति देखकर सबको सलाम है। ये ज्यादा जीता जागता उदारण है।
00 शासकीय दृष्टि श्रवण बाधितार्थ विद्यालय की गीत प्रस्तुति
कार्यक्रम में रायपुर से सुमन तिवारी नवमीं कक्षा की छात्रा ने भारत देश को समर्पिक करते हुए ऐ मेरे वतन के लोगों... तुम खुब लगा लो नारा, ये शुभ दिन है सबका.. लहरा दो तिरंगा प्यारा... का गायन कर सबका दिल जीत लिया। इसी तरह मेरी अवाज सुनो कार्यक्रम दिल्ली में प्रस्तुति दे चुकी व वाइस ऑफ छत्तीसगढ़ रूप वर्षा ब्लाइंड स्कूल रायपुर की छात्रा ने कहा चला मेरे ए जोगी.. जीवन से तू भाग के... का सुर छेड़ा तो सब सुनते ही रह गए। मेरी आवाज सुनो के ही मंच में प्रस्तुति दे चुकीं सरिता देवांगन ने सुनो सजना पपीहे ने कहा... सबसे पुकार के संभल जाओं चमन वालों कि आये दिन बहार के... गीत से सबका दिल जीत लिया। जागेश्वरी के गीत तेरी आंखों के सिवा इस दुनिया में रखा क्या है... की प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया।
00 रंगोली आर्टिस्ट ने दिखाया छग: रमन का विकास
कार्यक्रम में रंगोली आर्टिस्ट ने बहुत ही सुंदर कलाकृति बनाकर सबको स्क्रीन की ओर एक-टक देखने को मजबुर कर दिया। बहुत ही प्यारी थीम पर आर्टिस्ट की प्रस्तुति देखते ही बनती थी। देखते ही देखते सभी को स्क्रीन पर मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के कार्यकाल में हुए प्रदेश के विकास का दृश्य कलाकृति में दिखाई पड़ा। सभी ने सराहा। सभी ने स्वागत किया।


गरबा में तिरंगा थाम कमांडो की टोली ने किया उरी शहीदों को नमन (वीएनएस विशेष)

रायपुर | 12 अक्टूबर 2016 00 गरबा की धुनों में कृषि मंत्री भी नहीं रोक पाये अपने कदम
00 कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी दी श्रद्धांजलि, किया नमन
- रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। श्री शाकद्विपीय ब्राम्हण समाज के युवाओं की `मर्दानी वाहिनी` ने नवरात्रि की आखरी रात 10 अक्टूबर को हाथों में तिरंगा थाम, गरबा की धुनों में सेना के द्वारा हाल ही में पाकिस्तान में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक का जश्न मनाया और उरी के शहीदों को श्रद्धांजलि देकर नमन किया। कमांडो की वेशभूषा पहने जोश में सराबोर इन युवाओं की टोली को देखकर राजधानी के बुढ़ापारा स्थित आउटडोर स्टेडियम के मंच पर आसीन छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी अपने कदमों को रोक नहीं पाये। उन्होंने बीच मैदान में आकर हाथों में तिरंगा थामा तथा उरी के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सर्जिकल स्ट्राइक के लिए सेना को बहुत बधाई और शुभकामनाएं दी।

मर्दानी वाहिनी की लीडर रूपाली शर्मा ने वीएनएस से चर्चा के दौरान कहा कि उक्त थीम पर प्रस्तुति देने की प्रेरणा हमें अपने पिता हरनारायण शर्मा से मिली। रूपाली कहती हैं कि सेना है तो हम हैं। सेना के कारण ही पूरा देश चैन की नींद सो पाता है और हमारे जवान देश की रक्षा में दिन-रात अपने घर-परिवार से दूर सरहद में तैनात रहते हैं। पिछले माह 18 सितंबर की सुबह जम्मू काश्मीर के बारामूला में आतंकवादियों की नापाक हरकत के कारण शहीद हुए हमारे 17 जवानों की कुर्बानी व्यर्थ नहीं है। जिसका जवाब भारतीय सेना ने पाकिस्तान में घुसकर दिया। हमारी मर्दानी वाहिनी उन सभी शहीदों को नमन करती है व श्रद्धांजलि अर्पित करती है। रूपाली कहती हैं कि यदि आतंकवादी छुपकर नहीं सीधा सामना करते तो हमारे बहादुर सैनिक सभी का खात्मा कर देते। बहरहाल हम इस थीम के माध्यम से सभी को जागरूक करना चाहते थे और इसी उद्देश्य से हमने प्रस्तुती दी। शहीदों का सम्मान किया और सेना की सर्जिकल कार्यवाही का जश्न गरबा ग्राउंड में फटाखे फोड़कर भी मनाया।
रूपाली ने चर्चा के दौरान बताया कि उक्त ग्रुप ने सबसे पहले यह प्रस्तुती सत्तीबाजार स्थित श्री शाकद्विपीय ब्राम्हण समाज ट्रस्ट अंबादेवी मंदिर प्रांगण में दी। यहां श्री शाकद्विपीय ब्राम्हण समाज ट्रस्ट नवजागृति संगठन द्वारा विगत 16 वर्षों से गरबा का आयोजन किया जा रहा है। फिर इन युवाओं की टोली ने शहर के आउटडोर स्टेडियम में प्रस्तुती दी। मर्दानी वाहिनी की इस टोली में रूपाली शर्मा, मोनाली शर्मा, सोनाली शर्मा, चित्रा शर्मा, तनुश्री शर्मा, लतिका शर्मा, चित्रिका शर्मा, गीतिका शर्मा, निष्ठा शर्मा और सबसे छोटा कमांडो रौनक शर्मा (6 वर्ष) शामिल थे।
00 छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री ने सराहा, थामा हाथों में तिरंगा
उक्त टोली की प्रस्तुति को देखकर छग कृषि मंत्री बृजमोहन अग्रवाल भी मंच से उतरकर मैदान के बीच में आ गए। श्री अग्रवाल ने टोली के सभी युवाओं की प्रस्तुति की तारिफ की। युवाओं से तिरंगा लेकर स्वयं थामे और भारत माता की जय-जयकार लगाए। इस दौरान स्टेडियम का दृश्य देखते ही बन रहा था। उपस्थित सभी लोगों के द्वारा लगाये गए भारत माता की जयकार के नारों से पूरा माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया। श्री अग्रवाल ने इस दौरान कमांडो की वेशभूषा में आई मर्दानी वाहिनी की टोली के साथ सेल्फी भी ली और उरी के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सर्जिकल स्ट्राइक के लिए भारतीय सेना को बधाई व शुभकामनाएं दी। सुनो गौर से दुनिया वालों, बुरी नजर न हमपे डालों.... गीत पर इस ग्रुप की आकर्षक प्रस्तुति ने सबका दिल जीत लिया। कृषि मंत्री भी इस टोली के साथ जश्न में झूम उठे।



`अनेकता में एकता` की सीख दे गई बाजीराव मस्तानी की गरबा टोली (वीएनएस विशेष)

रायपुर | 10 अक्टूबर 2016 - रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। `इंसान से इंसान का भाईचारा` और आपसी प्रेम ही धर्म है और संस्कृति है। हम भारत में रहते हैं तो सबसे पहले भारतीय हैं, फिर सभी धर्म, जाति, संप्रदाय और जात-पात की बात आती है। ऐसे विचार रखने वाले प्रदेश के दो मुस्लिम युवा अपने अन्य साथियों के साथ बाजीराव मस्तानी थीम पर राजधानी के संकल्प नवदुर्गा उत्सव समिति के मंच पर आयोजित संकल्प डांडिया बीट्स-2016 में संदेश दे गए। राजधानी के एक निजी विश्वविद्यालय में अध्ययनरत अहमद जुनैद और ताहिर ने अपने साथियों को गरबा करते देख देखकर सीखा और मां दुर्गा की उपासना इस वर्ष से गरबा के माध्यम से शुरू किये। हालांकि 12 अक्टूबर को मोहर्रम पर्व के कारण ये दोनों युवा अपने गृहग्राम कोरिया रवाना हो गए हैं। रवाना होने के पहले दोनों युवाओं ने हमारे प्रतिनिधि से चर्चा करते हुए कहा कि उनके मन में ये बात अवश्य रहेगी कि वे लोग नवरात्र के अंतिम दिन गरबा नहीं कर पाएंगे। बहरहाल आपने बाजीराव मस्तानी फिल्म देखी है तो आप इस थीम को समझने में अधिक समय नहीँ गवाएंगे ।
अहमद ने चर्चा के दौरान हमारे प्रतिनिधि से कहा कि उसके साथी पिछले पांच वर्ष से उक्त मंच पर गरबा करते आ रहे हैं। पिछले वर्ष जब मैेंने अपने साथियों को गरबा की थीम पर अभ्यास करते देखा तो मेरे मन में भी गरबा सिखने की इच्छा जागृत हुई। मेरे साथियों ने गरबा के सभी स्टेप्स मुझे सिखाए और इस वर्ष मैंने भी गरबा के माध्यम से देवी दुर्गा की उपासना की। अहमद इन दिनों अपने साथियों के साथ गरबा मैदान में नहीं दिख रहा क्योंकि 12 अक्टूबर को मोर्हरम का पर्व होने के कारण के कारण अपने गृहग्राम रवाना हो चुका है। उसने एकम से पंचमी तक जमकर विभिन्न थीम पर अपने साथियों का साथ निभाया। अहमद कहता है कि हम भारत में रहते हैं और हम भारतीय है। जात-पात, मजहब, धर्म बाद में आता है। हमारे ग्रुप में एकता है। हम सभी साथी एक-दूसरे के पर्व व त्यौहार में भी शामिल होते हैं। एक साथ त्यौहार मनाते हैं। ग्रुप का एक अन्य सदस्य सैय्यद ताहिर कहता है कि उसने भी गरबा अपने साथियों के साथ खेलना इसी वर्ष से शुरू किया। और ताहिर भी अहमद जैसे ही सोच रखता है। दोनों मिलकर ग्रुप के अन्य साथी भूमि, महक, खुशी, पूजा, नैना, मयंक, अभिलाष, भावेश, सर्वत्र (सेवी), सौरभ का साथ दे रहे हैं। युवाओं की ये टोली राजधानी के मैट्स युनिर्वसिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही है।
00 सौहाद्र्रपूर्ण भाईचारे का वातावरण बनाना ही उद्देश्य : संजय श्रीवास्तव
गरबा के प्रमुख (आयोजक) रायपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष व भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता संजय श्रीवास्तव ने चर्चा के दौरान कहा कि यहां पारंपरिक गरबा नहीं होता। यहां सभी धुनों व गीतों पर गरबा किया जाता है। यहां सभी धर्म व वर्ग के लोग पहुंचते हैं। हमारा उद्देश्य ही इस मंच के माध्यम से राजधानी में सौहाद्र्रपूर्ण भाईचारे का वातावरण बनाना है।


गुजरात के गरबा में बिखरी छत्तीसगढ़ के पारंपरिक `राउत नृत्य` की छटा

रायपुर | 09 अक्टूबर 2016 00 जील डांस ग्रुप के युवाओं ने दी धमाकेदार गरबा प्रस्तुति
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। वैसे तो भारत में गरबा नृत्य का उदय गुजरात से हुआ है लेकिन आज रास गरबा की धूम पूरे देश के कोने-कोने तक मची हुई है। नवरात्र के अलावा भी अन्य त्यौहार के आयोजन हो या फिर शादी-विवाह या उत्सव गरबा जरूर खेला जाता है। वहीं गरबा में यदि अन्य पारंपरिक नृत्य का समावेश हो जाये तो नजारा चार चांद लगने जैसा प्रतीत होता है। ऐसा ही नजर थामने वाला नृत्य शनिवार देर रात तक शहर के बीटीआई मैदान पर संकल्प नवदुर्गा उत्सव समिति के संकल्प डांडिया बीट्स-2016 के मंच पर देखने को मिला। राजधानी के जील डांस एंड ग्रुप के युवाओं ने गरबा की धुनों पर छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य राउत नाचा की प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया। ग्रुप के युवा राउत नाचा की पारंपरिक पोशाक व हाथ में सजी हुई लकडिय़ां थामे गरबा करते दिखाई दिये।
जील डांस एकेडमी के प्रमुख मेडी सिंग व बनार्ड एलेक्सजेंडर ने चर्चा के दौरान हमारे प्रतिनिधि से कहा कि हम डांस एकडमी से हैं। आने वाले कुछ दिनों में दीपावली के दौरान छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्य राउत नाचा की झलक देखने को मिलती है। अब दीपावली को अधिक दिन शेष नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमारे ग्रुप ने गरबा की धुन में राउत नाचा करने थीम को चुना। कटोरा तालाब स्थित डांस एकडमी के इस ग्रुप में आशीष बारले, शुभम डोंगरे, शिवा सरकार, आकाश, ज्योत्सना पंसारी, रूची अग्रवाल और अभिनव मानिकपुरी शामिल है। ये ग्रुप शहर के मॉल में भी नृत्य की प्रस्तुती देता आ रहा है और कई इवेंट भी प्रस्तुत करता है।

मेडी व बनार्ड दिल्ली से हैं और राजधानी में डांस एकडमी संचालित कर रहे हैं और ग्रुप के बाकी सदस्य राजधानी से ही हैं तथा रायपुर के अलग-अलग शिक्षा संस्थान से पढ़ाई कर रहे हैं। सभी कल छत्तीसगढ़ के पारंपरिक राउत नाचा थीम पर गरबा के चौकड़ी, छकड़ी व घोड़ा रास स्टेप्स पर पूरी रात माता दुर्गा की उपासना में डूबे रहे। वेशभूषा से साथ कौड़ी से बने आभूषण पहने व सजी-धजी लकड़कियों को हाथ में थामे इस ग्रुप को गरबा करते सब एकटक निहारते रहे। सभी ने मौका मिलते ही इस ग्रुप के साथ सेल्फी तथा ग्रुप फोटो भी ली। नृत्य करते इस ग्रुप के मध्य बस राउत नृत्य के दोहे की कमी थी क्योकि गरबा की मर्यादा का पालन भी इस ग्रुप को करना था, जो इन्होंने भलीभांति किया।
00 23 को गणेश आचार्य रायपुर में
मेडी ने चर्चा के दौरान बताया कि 23 अक्टूबर को राजधानी के अंबुजा मॉल में बालीवुड के चर्चित कोरियोग्राफर व डांसर गणेश आचार्य रायपुर आ रहे हैं। जील डांस एकडमी द्वारा अंबुजा मॉल में 7 दिन की कार्यशाला आयोजित करने जा रहा है। जिसमें श्री आचार्य शिरकत करेंगे।

यातायात नियम बताने आया `हैलमेटधारी` युवाओं का गरबा ग्रुप (वीएनएस विशेष )

रायपुर | 08 अक्टूबर 2016 -रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य तथा मोटरसाइकल चलाते समय हैलमेट पहनने जनता को जागरूक करने मयंक डांस एंड ग्रुप ने शहर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान संकल्प गरबा बीट्स-2016 के मंच पर प्रस्तुती दी। ग्रुप के सभी सदस्य बाईकर्स की वेशभूषा में हैलमेट पहने दिखे। वहीं एक सदस्य ट्रेफिक पुलिस की भूमिका में सबको कंट्रोल करते दिखा। सभी ने मिलकर गरबा के स्टेप्स में ही नृत्य कर आकर्षक प्रस्तुती दी। यह ग्रुप रोजना एक नई थीम पर जन-जागरूकता फैला रहा है।
मंयक डांस एंड ग्रुप में भूमि, महक, खुशी, पूजा, नैना, मयंक, अभिलाष, भावेश, सर्वत्र (सेवी), सौरभ शामिल है। ये युवाओं की टोली राजधानी के मैट्स युनिर्वसिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रही है। मयंक ने चर्चा के दौरान हमारे प्रतिनिधि से कहा कि आज प्रदेश सरकार निरंतर हैलमेट पहनने के लिए जागरूकता फैला रही है। हमारे मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह स्वयं तथा अन्य मंत्रीगण समय-समय पर मोटरसाइकल रैली निकाल कर जनता को जागरूक करते हैं लेकिन देखने को आता है कि आज भी सभी हैलमेट नहीं पहनते। आज अपनी ही सुरक्षा के प्रति लोग जिम्मेदार नहीं है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ग्रुप ने उक्त थीम पर गरबा करना की रूपरेखा बनाई और शुक्रवार रात्रि इसी थीम पर गरबा कर यातायात नियमों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया गया। मयंक सहित ग्रुप के सारे सदस्य बाइकर्स की भूमिका में थे। ग्रुप का एक सदस्य सर्वत्र यातायात पुलिस की भूमिका में था।

00 बैनर,पोस्टर थाम किया गरबा





जन-जागरूकता फैलाने यातायात थीम पर इस ग्रुप के सदस्यों ने हाथों में डांडिया थामने के बजाए बैनर और पोस्टर थाम कर गरबा किया। बैनर व पोस्टर में हैलमेट पहन कर ही गाड़ी चलाएं। यातायात नियमों का पालन करें जैसे संदेश ही लिखे हुए थे। गरबा के विभिन्न स्टेप्स यातायात नियमों कते प्रति जागरूकता की थीम को सभी ने बहुत सराहा। युवाओं की इस सोच का सम्मान किया। ज्ञात हो कि यह ग्रुप रोजाना नए-नए थीम पर गरबा कर जन-जागरूकता का संदेश दे रहा है। पिछले पांच वर्ष से लगातार इस ग्रुप के सभी सदस्य बीटीआई रास गरबा कार्यक्रम में आ रहे हैं। हर दिन कुछ नया करने की सोच रखने वाली यह युवाओं की टोली आज शनिवार को माता के ज्योत-जवांरा विसर्जन की झांकी प्रस्तुत करने जा रही है।

बढ़ते अपराध पर जागरूक कर गया `कैदी- जेलर` का गरबा (वीएनएस विशेष)

रायपुर | 08 अक्टूबर 2016 00 बढ़ते अपराध से जनता को सर्तक करने युवाओं ने दिया संदेश
-रविशंकर शर्मा
रायपुर, (वीएनएस)। राजधानी में बढ़ रहे लगातार अपराध को दृश्याकिंत करती न्यू शांति नगर के युवाओं की टोली शुक्रवार देर रात अपराध के प्रति जनता को जागरूक रहने का संदेश दे गई। युवाओं में कोई कैदी बना तो कोई जेलर, बीटीआई मैदान पर संकल्प गरबा बीट्स-2016 के मंच पर प्रस्तुती मे बरबस लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इस ग्रुप की युवतियों ने आम जनता का किरदार निभाया। सभी ने मिलकर बढ़ते अपराधिक गतिविधियों पर प्रति चिंता जताते हुए गरबा के जरिए जागरूकता फैलायी।
ग्रुप के कमल नायक, राजेश, सागर, बबलू साहू, हरीश साहू, भूषण ,यादव कैदी की भूमिका में रास गरबा करते दिखेे। और शंकर साहू जेलर की भूमिका में तो सीमा साहू और अनिता गोस्वामी आम नागरिक की भूमिका में गरबा करते दिखे। कमल ने चर्चा करते हुए बताया राजधानी में लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। आये दिन खबरें मिलती रहती है जो चिंता का विषय है। अपराधी वारदात को अंजाम देकर निकल जाते हैं और पुलिस बस हाथ मलते रह जाती है। वहीं अपराधी पकड़े जाने पर जेल जाता है। उसने तो अपराध कर दिया लेकिन जेल जाने के बाद उसका परिवार कैसे जीवन यापन करता है वह नहीं सोचता। कमल कहता है कि आज जनता को जागरूक रहने की जरूरत है, कई अपराधिक गतिविधियां जैसे चेन स्नेचिंग व झांसे में आकर लूट हो रही है। इन सभी घटनाओं को देखते हुए इस ग्रुप ने चोर-कैदी-पुलिस और जनता की थीम में रास गरबा करने का निर्र्णय लिया।
सागर कहता है कि गरबा माता दुर्गा की उपासना का प्रतीक है। गरबा स्थल पर हजारों लोग रोजाना पहुंचते है। इन सभी के बीच अपराधिक गतिविधियों से बचने और अपराध न करने की थीम पर हमने जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से इस थीम का चयन किया। आज जनता को जागरूक रहने की जरूरत है और पुलिस प्रशासन को भी चाहिए कि राजधानी में क्राइम पर लगाम लगाए। इस ग्रुप द्वारा कैदी, पुलिस और आम नागकि की वेशभूषा में गरबा के चौकड़ी, छकड़ी और घोड़ा रास के स्टेप्स आकर्षण का केंद्र रहे।
00 छोटी उम्र में बड़ी और सकारात्मक सोच
इस ग्रुप में सभी सदस्यों की उम्र लगभग 18 से 22 के मध्य बीच ही है। सभी कॉलेज में अध्ययनरत है और एक ही मोहल्ले से हैं। पिछले पांच वर्ष से शहर के बीटीआई मैदान पर गरबा करते आ रहे हैं। हर बार कुछ नया संदेश देने का प्रयास करते हैं। शुक्रवार को नरवात्रि के सातवे दिन और षष्टमी तिथि को इस ग्रुप ने जो संदेश सबके मध्य दिया, सभी ने सराहा और संदेश का सम्मान भी किया।